
बस्तर बैंड के संस्थापक पांडे ने रायपुर में कहा, बचपन से संगीत का लगाव, संघर्षों से मिली सफलता।
दुर्गा प्रजापति
बिलासपुर भारत सरकार ने संगीत नाटक अकादमी अवार्ड 2025 की घोषणा की है, जिसे पद्मश्री अनूप रंजन पांडे को प्रदान किया जाएगा। पांडे ने यह सम्मान अपने गांव, जिले और प्रदेश को समर्पित किया है। उन्होंने रायपुर स्थित अपने सेल कर कॉलोनी शंकरनगर निवास पर लेखक राजेश पांडे से चर्चा में यह बात कही। इस दौरान राजेश पांडे ने उन्हें फल-माला पहनाकर पुस्तक भेंट की। पांडे ने बताया कि उनका जन्म एक सामान्य परिवार में 21 जुलाई 1965 को बिलासपुर में हुआ। माता मनोरमा देवी पांडे भजन गाती थीं और पिता राधेश्याम पांडे संस्कृत के विद्वान थे। बचपन से ही संगीत के प्रति उनका झुकाव था। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से पीएचडी की।
विश्व प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर की संस्था से जुड़कर अनेक नाटकों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
सन 1990 में वे बस्तर के जंगलों में संगीत की खोज में गए और वहीं बस गए।
उन्होंने स्थानीय कलाकारों को साथ लेकर ‘कोईतुर पहाड़’ नामक मंच का गठन किया, जो बाद में ‘बस्तर बैंड’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस बैंड ने तीस प्रकार के वाद्ययंत्रों के समूह से साक्षरता, टोनही प्रथा, अशिक्षा, अंधविश्वास और बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाई। उनका नारा था ‘बंदूक नहीं ढोल चुनो’। बस्तर बैंड ने यूरोप के कई देशों में प्रस्तुतियां दीं। 28 फरवरी 2019 को उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री सम्मान मिला था। पांडे ने मल्हार निवासी ठाकुर सुमेर सिंह को अपने कॉलेज के सहपाठी बताया और मल्हार से अपने बचपन के जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जन्मभूमि से मिले सम्मान का महत्त्व अपूर्व होता है। राजेश पांडे ने उन्हें मल्हार भ्रमण के लिए आमंत्रित किया, जिस पर पांडे ने सहमति व्यक्त की।