
बिलासपुर मस्तूरी विकासखंड में एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) पर आंगनबाड़ी केंद्रों के रखरखाव और रंगाई-पुताई के लिए आए सरकारी फंड में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। विभाग पर नौनिहालों के पोषण और प्राथमिक शिक्षा से जुड़े फंड के बंदरबांट का मामला सामने आया है।
मिली जानकारी के अनुसार, मस्तूरी विकासखंड में लगभग 300 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। नियमानुसार इन केंद्रों का समय-समय पर रखरखाव और रंग-रोगन किया जाना चाहिए। हालांकि, जमीनी हकीकत में अधिकांश केंद्रों की दीवारें जर्जर और प्लास्टर उखड़े हुए हैं।

जबकि विभागीय फाइलों में सभी आंगनवाड़ियों की शानदार रंगाई-पुताई होने का दावा किया गया है।
सूत्रोंसे मिली जानकारी के मुताबिक, इस कथित घोटाले की कार्यप्रणाली चौंकाने वाली है। आंगनबाड़ी केंद्रों के रंग-रोगन के लिए प्रत्येक सेक्टर को 50 से 60 हजार रुपये का फंड जारी किया गया था। आरोप है कि विभाग के एक रसूखदार अधिकारी ने मौखिक निर्देश जारी कर यह पैसा वापस मंगा लिया। अधिकारी ने कथित तौर पर निर्देश दिया कि पूरे केंद्र की पुताई के बजाय केवल एक दीवार की पुताई की जाए और उसी की फोटो खींचकर विभाग को भेजी जाए, ताकि कागजों में काम पूरा दिखाया जा सके।
बताया जा रहा है कि अधिकारियों के इस निर्देश के आगे
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी बेबस थीं और उन्होंने आदेश का पालन किया। सभी सेक्टरों में आंगनबाड़ी केंद्रों की सिर्फ एक दीवार पोती गई, उसकी तस्वीर ली गई और उसे विभागीय अधिकारियों के पास भेजकर ‘काम पूरा’ होने की रिपोर्ट फाइल की गई। इसके बाद, उस बड़े फंड का विभाग के भीतर ही कथित तौर पर बंदरबांट कर लिया गया। जानकारों का कहना है कि यह मामला अगर पूरे जिले के पैमाने पर जांचा जाए, तो लाखों रुपये के बड़े गबन का खुलासा हो सकता है।