
कलेक्टर के निर्देशों की अनदेखी, विवादित प्राचार्य मनोज सराफ छात्रा बहुल पाली हाईस्कूल में दोबारा पदस्थ।
कृष्ण कुंभकार
कोरबा तत्कालीन कलेक्टर अब्दुल हक के सख्त निर्देशों के बावजूद शिक्षा विभाग ने विवादित प्राचार्य मनोज सराफ को बार-बार छात्रा बहुल पाली हाईस्कूल में पदस्थ किया है।
सराफ के आचरण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यह मामला 2018 का है, जब प्राचार्य मनोज सराफ जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड स्थित तानाखार हाईस्कूल में पदस्थ थे।
3 जून को उन्हें स्कूल भवन में एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में ग्रामीणों ने पकड़कर कटघोरा पुलिस के हवाले किया था। पुलिस की प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद एसडीएम कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी और उन्हें जेल जाना पड़ा था।
तब तत्कालीन कलेक्टर मोहम्मद कैसर अब्दुल हक ने घटना की विस्तृत रिपोर्ट कार्रवाई की अनुशंसा सहित बिलासपुर संभागायुक्त को भेजी थी। साथ ही शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सराफ को छात्राओं वाले स्कूल में पदस्थ न किया जाए।
इसके बाद सराफ को निलंबित कर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया था।
वर्ष 2019-20 में सराफ बहाल हुए। तत्कालीन कलेक्टर अब्दुल हक के स्थानांतरण और कलेक्टर किरण कौशल के कोरबा में पदस्थापना के बाद शिक्षा विभाग ने नियमों को दरकिनार करते हुए सराफ को पाली हाईस्कूल में पदस्थ कर दिया, जहां करीब 70 प्रतिशत छात्राएं अध्ययनरत हैं।
वर्ष 2021 में पाली हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं ने सराफ के आचरण के विरुद्ध आंदोलन किया,
जिसके बाद उन्हें फिर से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया था। लेकिन, वर्ष 2022 में वह अपनी पदस्थापना पुनः पाली हाईस्कूल में कराने में सफल रहे और तब से वहीं जमे हुए हैं।
शिक्षा विभाग की इस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।