
ज्येष्ठ अमावस्या पर सुहागिनों ने की वट वृक्ष की परिक्रमा, शनि मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई।
दुर्गा प्रजापति
बिलासपुर ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री का व्रत किया। इस वर्ष वट सावित्री व्रत और शनि जयंती एक ही दिन होने से मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ जुटी। सुबह से ही महिलाएं सोलह श्रृंगार कर वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं।
उन्होंने वट वृक्ष को जल, कच्चा सूत, रोली, चावल, फूल और भीगे चने चढ़ाकर परिक्रमा की। मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लिए थे।
इसी विश्वास के साथ महिलाओं ने वट वृक्ष में कच्चा सूत लपेटकर सात या 108 परिक्रमा कर पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगा।

पूजा के बाद महिलाओं ने व्रत कथा सुनी और बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। ज्येष्ठ अमावस्या को शनिदेव का जन्मोत्सव होने के कारण शनि मंदिरों में भी विशेष पूजा हुई। भक्तों ने शनिदेव को सरसों का तेल, काले तिल, उड़द और नीले फूल चढ़ाकर शनि दोष से मुक्ति की प्रार्थना की। इस दिन वट सावित्री व्रत और शनि जयंती का संयोग शुभ माना जाता है। इस दिन किया गया, दान-पुण्य और व्रत अधिक फलदायी होता है। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सुहाग की शुभकामनाएं दीं।