
जिला अस्पताल में 85 यूनिट ओ-पॉजिटिव रक्त था, युवती को नहीं मिला; नियमों की अनदेखी से मौत।
राजेंद्र सोनी
दुर्ग भिलाई के जिला अस्पताल में संवेदनहीनता का एक मामला सामने आया है, जहां समय पर रक्त न मिलने से एक 20 वर्षीय युवती की मौत हो गई। स्वजनों का आरोप है कि अस्पताल के ब्लड बैंक में ‘ओ पॉजिटिव’ रक्त की 85 यूनिट सुरक्षित थी, इसके बावजूद युवती को खून नहीं दिया गया। मरोदा भिलाई निवासी दीपिका गाढ़ा कई दिनों से बीमार थी। शनिवार रात करीब 11 बजे उसे जिला अस्पताल लाया गया। जांच में उसके शरीर में खून की भारी कमी (हीमोग्लोबिन करीब पांच ग्राम) पाई गई और तुरंत रक्त चढ़ाने की जरूरत बताई गई। परिवार ने आरोप लगाया कि आर्थिक कमजोरी के कारण वे तुरंत डोनर नहीं जुटा सके। उन्होंने अस्पताल स्टाफ और ब्लड बैंक से कम से कम एक यूनिट रक्त देने की मांग की, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। उनकी मां लगातार गिड़गिड़ाती रहीं, पर कोई मदद नहीं मिली। इलाज के दौरान दीपिका ने दम तोड़ दिया। सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने बताया कि युवती सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित थी। उन्होंने आशंका जताई कि मौत का कारण केवल खून की कमी न होकर एस्पिरेशन (खाना या अन्य पदार्थ का फेफड़ों में जाना) भी हो सकता है। वास्तविक कारण पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट होगा। मामले की जांच के लिए टीम बनाई गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमानुसार, सिकलिन, थैलैसीमिया और हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को आपात स्थिति में बिना किसी ‘एक्सचेंज डोनर’ और प्रोसेसिंग शुल्क के तुरंत खून उपलब्ध कराना चाहिए। इसके बावजूद ब्लड बैंक कर्मियों ने नियमों का गलत हवाला देकर दीपिका को खून देने से मना किया।