
मस्तूरी दुनिया में कितना गम है औरों का गम देखा तो मेरा गम कितना कम है यह कहावत नगर पंचायत से लगा ग्राम जैतपुर के बाल विधवा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गौरी पाण्डेय के ऊपर चरितार्थ होती है उन्होंने बतलाया कि ईश्वर ने तो मुझे हाथ पर आंख कान मुह दिया है लेकिन मैं कई लोगों को देखा जो जन्म से नेत्रहीन दिव्यांग है इसलिए मेरा मन शांत हो जाता है इस बारे में नगर के लेखक राजेश पाण्डेय ने उनसे भेंट करके उनके आंगनबाड़ी केंद्र में जाकर जानकारी लिया उनके अनुसार जैतपुर के चंद्र भगा बडकु मिश्रा के घर 2 जनवरी 1965 को जन्म लेने वाली गौरी पाण्डेय का दो भाई गौतम गोवर्धन मिश्रा है उनकी प्राथमिक शिक्षा ग्राम में हुआ फिर भानुप्रतापपुर में इनके मामा इनको ले गए उस समय वह वीडियो थे इसके बाद उस समय लड़की घर के बाहर नहीं जाती थी तब पुराने 11वीं पढ़ने के कारण 1 दिसंबर 1985 को मात्र 250 रुपए से इन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में भर्ती हुए जो आज 42 वर्षो से सेवा करते पूरे हो गए ग्राम के ही उनके पड़ोसी रविंद्र वैष्णव बतलाते हैं कि नारी शक्ति क्या है और कलयुग में दुर्गा देवी के स्वरूप महिला कैसे कार्य करती हैं यह गौरी पाण्डेय के रचनात्मक कार्यों को देखने से पता चलता है चाहे नशा मुक्ति टीकाकरण पल्स पोलियो जनसंख्या गणना मतदाता सूची दहेज प्रथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बाल विवाह अंतर जाति विवाह महिला कमांडो जैसे अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में वे पूरे समय तन मन धन लगाकर सेवा देती है शिक्षक आकाश कैवर्त ने बतलाया कि हम लोग बहुत छोटे-छोटे थे उस समय बिजली हमेशा बंद रहती थी तब गांव के लोगों को गिरते पानी में अपने घर में लालटेन के रोशनी के सहारे पढ़ाते थे और सामान्य ज्ञान से लेकर देश दुनिया का सभी जानकारी देते थे गौरी पाण्डेय आज इस ग्राम के ही
नहीं बल्कि क्षेत्र के लिए महिलाओं के लिए आदर्श के रूप में स्थापित हो गई है पाण्डेय ने बतलाया कि सन् 1910 में डेनमार्क के क्लारा जेटिन ने महिलाओं के लिए एक सभा का आयोजन किया तब से 8 मार्च के दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रुप में मनाने का परम्परा शुरू हो गया इस वर्ष इसका थीम कार्यवाहि में तेजी लाना है